नीलकंठ शिवाय

नीलकंठ शिवाय

कोई कहे त्रीलोकी मुझको , कोई अंतरयामी ,
कोई कहता है पालनहारा , कोई मृत्यु स्वामी ।

चंद्र विराजे शिश पर , त्रिशूल पर ब्रह्मांड है ,
नाग वासुकी कंठ पर , और नेत्र में विनाश है ।

अनंत हूँ समय सा मैं , मैं भक्त का गुरूर हूँ ,
शिवा शिवा करे है जो , उस भक्ति में मैं चूर हूँ ।

अजर हूँ मैं अमर हूँ मैं , जीवन मरण से मुक्त हूँ ,
जो दूसरों का विष पीये , उस भक्त का मैं भक्त हूँ ।

मुझे स्वर्ग नरक से क्या , मैं मोक्ष का द्वार हूँ ,
मुझ ही से वेद पुराण हैं , गीता का मैं सार हूँ ।

ज्वाल हूँ वरूण हूँ मैं , सुरों का मैं ही इंद्र हूँ ,
ग्रह हैं मेरे गर्भ में , ब्रह्मांड का मैं केंद्र हूँ ।

तपस्वी का तप हूँ मैं , वैरागी का वैराग हूँ ,
भोग हूँ मैं भोगी का , योगी का मैं जाप हूँ ।

हर सवाल का जवाब हूँ , विवाद का उपाय हूँ ,
देवों का महादेव हूँ , मैं तेरा नीलकंठ शिवाय हूँ ।

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