TUJHE BHULA NAHI SAKTE – O BEKHABAR (KAVITA)


iss kavita ke madhyam se kavi is jag ko apane dil ka hal bayan karna chahte hai, ki akhir kis tarah vo akelepan se lar kar ji rahe hai, kis tarah unhen as–pas ki chize unake masuka ke sath bitaye hue pal ko yaad karti hain, ve bar bar bhulana kahate hai bar unhen bhulane nahi deti hai duniyan.

 

हम तुझे भुला नहीं सकते

तू मिले या ना मिले

तू चाहे न चाहे मुझे

तू पूछे ना खै़रीयत मेरी

तू भले न पहचाने मुझे

ये सख्तियां, नादानियां

इस दिल को बता नहीं सकते

हम तुझको भुला नहीं सकते


तू सोए गैर की बाहों में

तू घूमे मस्त बहारों में

हम रोएं रातों सिसक सिसक

दिल भटके तेरी यादों में

ये इश्किय
ख़ुद पर आज़मा नहीं सकते

हम तुझको भुला नहीं सकते


जो ख्वाब देखे थे कभी

मिलकर हमने रातों में

कहा था साथ निभाएंगे


is kavita ko kavi ek madhyam bana kar apni masuka ko vapas apane pas bulana chahte hai, beete hue kuchh hasin lamhon ko yad kara kar kavi unke soye hue armanon ko jagane ki kosis kar rahe hai, unke patthar bane hue dil ko phir us mom ki tarah banna chahte hai, kavi apne purane pyar ko phir ek bar pana chahate hai.

 

ओ बेखबर

ओ बेखबर ,बेदर्द जालिम और न आज़मा

पुकारे तेरा आशिक आजा लौट आ वापिस आ

गुज़रे लम्हे ,बीते बरस पर पहले जैसी बात नहीं

दिन का चैन बचा नहीं , सुकूँ की कोई रात नहीं

सूखे होठ हैं बिन हँसी के आखें सूझी हो नमी से

आसमाँ है रूठा सा बंज़र दिल की जर्द जमीं से


पत्थर दिल पिघला ले अब फिर मोम सा बन जा

पुकारे तेरा आशिक आजा लौट आ वापिस आ


क्या याद तुझे सीने से लगकर रात कटी थी बाहों मे

क्या याद तुझे मुझे लगी थी ठोकर चलती राहों में

तू मरहम सा बनकर मेरे हर दर्द से लड़ा था

जाया थी जिंदगी मेरी,तू हर मोड़ पे खड़ा था


याद कर पिछले जमाने ,आजा प्यार के नग्मे गाने

की जुल्मो-सितम न ढा, इश्क़ और न आज़मा

पुकारे तेरा आशिक आजा लौट आ वापिस आ


ओ बेखबर बेदर्द ज़ालिम ओर न आजमा

पुकारे तेरा आशिक आजा लौट आए वापिस आ


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