MERE PYAR KI KAHANI | LOVE POEM

Love Poem for Someone Special

Mere Pyar ki Kahani poem is dedicated to someone very special and close to my heart. Read and share status dairy’s love poem ,best love poem in Hindi, love poetry etc. with your friends in status.


mere-pyar-ki-kahani-status-dairyमेरे प्यार की कहानी

ढूंढ आये जिनको हम ये दुनिया सारी,
आयी खुद पास मेरे वो बिंध प्यारी,
पर पीर में क्या कहूं बिछड़ की मै उनसे,
तड़प रही ये आत्मा तक है हमारी..

बरसो तक ताराशा जिनको इस जग में,
आज देखो खरी वो हैं अपने बांहे पसारी,
हा बरसों इंतज़ार के तालाब से ही सही,
लेकिन कोई तो बनी हमारे प्यार से हमारी,

पर पीर में क्या कहूं बिछड़ की मै उनसे,
तड़प रही ये आत्मा तक है हमारी..
मिलने से पहले डर था हम की कही,
वो बींध प्यारी हमसे रूठ तो ना जाएंगी,
और सपनों की पारी हमारी कहीं हमसे रूठ तो ना जाएंगी,

कहीं इस नादान चेहरे से हमारे वो,
हमसे छूट कर दूर तो नहीं होजाएंगी,
पर मिलने से दूर हुई वो भ्रम हमारी सारी,
पर पीर में क्या कहूं बिछड़ की मै उनसे,
तड़प रही ये आत्मा तक है हमारी..

और भावनाएं साड़ी निखर गई हमारी,
गया जब मै उनके दिल की फुलवारी,
और भी पास आ गई वो दिलरुबा हमारी,
पर पीर में क्या कहूं बिछड़ की मै उनसे,
तड़प रही ये आत्मा तक है हमारी..

पता न था कि दिन इतने वो दूर हो जायेंगी,
घर में रुकने को अपने मजबूर हो जायेंगी,
तस्वीर में उनकी निगाहें हमारी खो जायेंगी,
डर है इस आलम में हमसे कहीं खो तो ना जायेंगी,

पर है भरोसा कि वो और निखर कर आयेंगी,
पर पीर में क्या कहूं बिछड़ की मै उनसे,
तड़प रही ये आत्मा तक है हमारी ।।

  कवि: अमन जी


chaen-kahan-paate-hai-status-dairyचैन कहां हम पाते हैं..!

ये कुदरत के कितने हसीन नज़ारे हैं,
दिल बहलाने को हम सबो का देखो,
इस धरा पर ये प्रकृति बन पधारे हैं,
जिनके बीच जा कर लोग सब गम भूल जाते हैं,
हमने देखा है वहां भी कई बार जाकर,
चैन कहां हम पाते हैं चैन कहा हम पाते हैं..

दिल दहल जाता है हमारा सपने में भी,
दूर जब कभी वो हमसे हो जाते हैं,
कभी हसाते कभी रुलाते तो कभी हमें सताते हैं,
पर रूठ जाते हैं कभी गर वो तो क्या कहें,
तो चैन कहां हम पाते हैं चैन कहा हम पाते हैं..

बातें हमारी केहने से पहले ही,
दिल की वो ना जानें कैसे जान जाते हैं,
और प्यार करते हैं हम इतना की निपट अकेले पल भर भी नहीं रह पाते हैं,
और इस बेचारे दिल को मेरे,
बस और बस एक वहीं तो भाते हैं,

और प्यार करते हैं हम तभी तो,
अकसर रूठते और मनाते हैं,
पर बिछड़ कर पल भर भी उनसे,
चैन कहां हम पाते हैं चैन कहा हम पाते हैं..

निपट अकेले दिल को मेरे,
बस एक वही तो भाते हैं,
पर यूहीं कुछ बातों से हमारे,
रूठ कभी- कभी वो जाते हैं,
पर ना जो देखें मुखरा वो हमारा,
तो चैन कहां वो पाते हैं चैन कहां वो पाते हैं..

प्यारी-प्यारी बातों से उनके,
कायल उनके हम हों जाते हैं,
और बिना उनकी यादों के पल भर भी हम कहां रह पाते हैं..

तरस गई हैं ये अंखियां हमारी,
झलक उनकी एक पाने को
पर वो असमंजस से हैं घीरी कीक्या बताएंगी जमाने को,
और उन्हें यह डर भी है कि दूर हो कर उनसे,
कहीं हम कहीं खो तो ना जाएंगे,
इसलिए जी करता है जल्द मिलें हम उनसे,
और बांहों में भर कर उनको प्यार अपना हम दिखलाए।।

     कवि: अमन जी


SHAYAD TUNE NAHI SAMJHA MUJHE – HINDI KAVITA

Jiski Hm dono ki samajh na thi…
Jab Choti Choti baato par ladai ho jati thi…
Saath saath to rahte the …..
Par bahut gambhir na the…

Jab ye pata ni chalta tha….
Kyun dil me tadap aane lagti thi…..
Jab gusse me aakar…
Kuch dino hamari baat band ho jati thi…

Aur milte hi dono ke chehre par hassi aa jati thi….
Mano gussa to kabhi tha hi ni….
Aur kuch hi pallo me…
Ek dusre ki ahmiyat hi bhool jate the…

Phir pata ni chalta tha…
Kab ice cream khate khate shaam ho jati thi….
Ek dusre ke kandhe par haanth rakhe …
Kab sadak par ghanto bhatakte rah jaate the…

Ghanto tmse Galle milkar khade rahna…
Ek sukun sa hota tha….
Hamari saanso me ek khusboo si aa jati thi..
Phir yunhi baithe baithe ek dusre ko…
Jameen par bachho ki tarah patakne Wala khel khelna….

Aur raat hone par apne apne Ghar chale Jana…
Agle din phir se wahi Sab dohrana…
Is tarah saalo nikal gaye…
Hasi khel me gambhir hona hi bhool gaye….

Is baat ki samajh hi na aayi….
Ek din dono ko alag hona hoga….
Apne apne jeevan me mukam dhundhna hoga…
Apne apne jeevan me khusiya dhundhna hoga…

Hamar bichadna bhi gambhir na tha….
Mano kuch to ni hua tha….
Kuch hi dino me mai apne kaam par lag gaya tha….
Tum kahin aur chali gayi….

Dheere dheere jab yah samay Gujara…
Tumhare na hone ki kami mahsoos hui….
Aaj tadap aati hai…
Par tmse Milne ke upay na dikhta….

Us rishtey ki gahrai ab samajh aati…
Jise khulkar bahut ijhar na kiya…
Jis rishtey me hmdono bahut gambhir na the…
Wahi prem tha,yeh baat aab samajh aati hai…..

Jiski Hm dono ki samajh na thi…
Jab choti choti baato par ladai ho jati thi…
Saath saath to rahte the …..
Par bahut gambhir na the…

-: KUMUD POETRY:-


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