HINDI KAVITA | ज़िंदा रावण बहुत पड़े हैं।

कविता : ज़िंदा रावण बहुत पड़े हैं।

दुनिया में इस नाम का दूसरा कोई व्यक्ति नहीं है। राम तो बहुत मिल जाएंगे लेकिन राजाधिराज लंकाधिपति महाराज रावण नहीं।


ZINDA RAVAN BAHUT PADE HAIN | HINDI KAVITA

अर्थ हमारे व्यर्थ हो रहे, पापी पुतले अकड़ खड़े हैं,
काग़ज़ के मत फूँकों, ज़िंदा रावण बहुत पड़े हैं।
कुंभ-कर्ण तो मदहोशी हैं, मेघनाथ भी निर्दोषी है,
अरे तमाशा देखने वालों, इनसे बढ़कर हम दोषी हैं।
अनाचार में घिरती नारी, हाँ दहेज की भी लाचारी,
बदलो सभी रिवाज पुराने, जो घर-घर में आज अड़े हैं।
काग़ज़ के मत फूँकों, ज़िंदा बहुत पड़े हैं।।

सड़कों पर कितने खर-दूषण, झपट ले रहे औरों का धन।
मायावी मारीच दौड़ते, और दुखाते हैं सब का मन।
सोने के मृग-सी है छलना, दूभर हो गया पेट का पलना।
गोदामों के बाहर कितने, मकरध्वज से जाल कड़े हैं।
काग़ज़ के मत फूँकों, ज़िंदा रावण बहुत पड़े हैं।।
लखनलाल ने सुनो ताड़का, आसमान पर स्वयं चढ़ा दी।
भाई के हाथों भाई के, राम राज्य की अब बरबादी।
हत्या, चोरी, राहजनी है, यह युग की तस्वीर बनी है,
आज जाति अरु धर्म मे देखो,
आपस मे ही बड़ी ठनी है।

न्याय, व्यवस्था में कमज़ोरी, आतंकों के स्वर तगड़े हैं।
काग़ज़ के मत फूँकों, ज़िंदा रावण बहुत पड़े हैं।।
बाली जैसे कई छलावे, आज हिलाते सिंहासन को,
खड़ा विभीषण सोच रहा है, अपना ही सर नोच रहा है।
नेताओं के महाकुंभ में, सेवा नहीं प्रपंच बड़े हैं।
काग़ज़ के मत फूँकों, ज़िंदा रावण बहुत पड़े हैं।।

: श्री आशिस

 



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BEST POEM IN HINDI 2020

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शराब की दुकान

छुटकू बड़कू और कलुवा , सब आंख नाक कान लगाए बैठो है,
सामने वालो तो बस एक छोटी सी, दुकान लगाए बैठो है।
सोचता हूँ कि दिन भर क्यो भीड़ लगी रहती है ,दुकान पर उसकी,
पता चला कि ससुरा ,शराब की दुकान लगाए बैठो है।।।।

SHARAAB KI DUKAAN

chhutakoo badakoo aur kaluva , sab aankh naak kaan lagae baitho hai,
saamane vaalo to bas ek chhotee see, dukaan lagae baitho hai.
sochata hoon ki din bhar kyo bheed lagee rahatee hai ,dukaan par usakee,
pata chala ki sasura ,sharaab kee dukaan lagae baitho hai….

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तेरा होके भी तेरा होने नहीं देते है

सोना चाहूँ जो तेरे ख़्यालातों के संग, तो सोकर भी वो मुझे सोने नहीं देते है।
रोना चाहूँ जो तेरी याद लेकर , तो नैना मुझे रोकर भी रोने नहीं देते है।
बड़ी कश्मकश के साथ तेरे हवाले तो कर दिया है, ख़ुद को मैंने
मगर जाने क्या ख़्यालात है दिल में, जो मुझे तेरा होके भी तेरा होने नहीं देते है।।

TERA HO K V TERA HONE V NAHI DETE HAIN

sona chaahoon jo tere khyaalaaton ke sang, to sokar bhee vo mujhe sone nahin dete hai.
rona chaahoon jo teree yaad lekar , to naina mujhe rokar bhee rone nahin dete hai.
badee kashmakash ke saath tere havaale to kar diya hai, khud ko mainne
magar jaane kya khyaalaat hai dil mein, jo mujhe tera hoke bhee tera hone nahin dete hai..

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मामा का रिश्ता

मैन बहुत सी कविताओ को रुख दिया,
मगर मामा शब्द में बड़ा ही मिठास होता है।
छू लेता है वो बहुत से रिश्तों को एक साथ,
क्योकि उसमे माँ रूपी दो शब्दों का वास होता है।
होती है लड़ाईया बहुत फिर भी झुक जाता है वो,
क्योंकि खुद से ज्यादा उसे अपनो पे विश्वास होता है।
देखा नही था मैंने अपने को ,मगर कमी किसी बात की भी न आई थी।
शायद मुझ पर मेरी माँ के बाद उसके ममता की ही परछाई थी।।
होती है ज्यो तकलीफ तो न जाने कैसे वो पास होता है,
सच मानो ये मामा का रिश्ता भी बड़ा खाश होता है।।।

MAAMA KA RISHTA

main bahut see kavitao ko rukh diya,
magar maama shabd mein bada hee mithaas hota hai.
chhoo leta hai vo bahut se rishton ko ek saath,
kyoki usame maan roopee do shabdon ka vaas hota hai.
hotee hai ladaeeya bahut phir bhee jhuk jaata hai vo,
kyonki khud se jyaada use apano pe vishvaas hota hai.
dekha nahee tha mainne apane ko ,magar kamee kisee baat kee bhee na aaee thee.
shaayad mujh par meree maan ke baad usake mamata kee hee parachhaee thee..
hotee hai jyo takaleeph to na jaane kaise vo paas hota hai,
sach maano ye maama ka rishta bhee bada khaash hota hai…

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स्कूल का बस्ता

मैं तो सिर्फ एक ही फूल वाला गुलदस्ता हूँ।
किसी दुकान में महँगा, तो किसी मे सस्ता हूँ।
आंखे भीगी,यादे धुंधली,दिल बेचैन कर देता हूं,
मुझे हल्के में मत लेना, मैं तुम्हारे स्कूल वाला बस्ता हूँ।।

SCHOOOL KA BASTA

main to sirph ek hee phool vaala guladasta hoon.
kisee dukaan mein mahanga, to kisee me sasta hoon.
aankhe bheegee,yaade dhundhalee,dil bechain kar deta hoon,
mujhe halke mein mat lena, main tumhaare skool vaala basta hoon..

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उनका बेटा लिखता भी है

दिल है मजबूत पर बाहर से वो मासूम दिखता भी है,
किलकिलाती धूप और बेमौसम में अपनों के लिए वो बिकता भी है।
चाहता है कुछ नया कर गुजरने को और इबादत लिखने को,
मगर उन्हें नही पता उनका बेटा उनके लिए कुछ लिखता भी है ।।

मेहनत,लगन,पसीना दिखता है उसकी सुबह की शुरुआत से,
क्योकि अच्छी सुबह का सपना देखता है वो बीती हुई रात से।
देखे हुए सपनो का आज असर उसे अब दिखता है,
उन्हें अब पता है की ,उनका बेटा उनके लिए भी कुछ लिखता है।।
अब हर रोज वो नई मुस्कराहट के साथ जगता है,
उन्हें अब पता है कि उनका बेटा उनके लिए भी कुछ लिखता है।।।

UNKA BETA LIKHTA V HAI

dil hai majaboot par baahar se vo maasoom dikhata bhee hai,
kilakilaatee dhoop aur bemausam mein apanon ke lie vo bikata bhee hai.
chaahata hai kuchh naya kar gujarane ko aur ibaadat likhane ko,
magar unhen nahee pata unaka beta unake lie kuchh likhata bhee hai ..

mehanat,lagan,paseena dikhata hai usakee subah kee shuruaat se,
kyoki achchhee subah ka sapana dekhata hai vo beetee huee raat se.
dekhe hue sapano ka aaj asar use ab dikhata hai,
unhen ab pata hai kee ,unaka beta unake lie bhee kuchh likhata hai..
ab har roj vo naee muskaraahat ke saath jagata hai,
unhen ab pata hai ki unaka beta unake lie bhee kuchh likhata hai…

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बाज सी आंखें

न जाने क्यों आज मेरी तबियत थोड़ा नासाज सी है,
आंखे झुकी, उदास चेहरा मेरा, ये बात भी कुछ राज सी है।
उन्हें वहम है कि उनका, पीठ पीछे वाला इश्क़ दिखता नही हमे,
उन्हें बताओ कि कमजोर तो जिस्म हुआ है, आंखे आज भी बाज सी है।।

BAAZ SI AANKHEN

na jaane kyon aaj meree tabiyat thoda naasaaj see hai,
aankhe jhukee, udaas chehara mera, ye baat bhee kuchh raaj see hai.
unhen vaham hai ki unaka, peeth peechhe vaala ishq dikhata nahee hame,
unhen batao ki kamajor to jism hua hai, aankhe aaj bhee baaj see hai..

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पथिक है मुसाफिर

पथिक है मुसाफिर , तो पथिक बन के चल तू,
डगर को निडर कर न व्यतिथ बन के चल तू।
ले हौसले को हौसले से , न अतिथ बन के चल तू,
पथिक है मुसाफिर , तो पथिक बन के चल तू।।
है सर तेरा, है पाँव तेरा, ये धूप भी ये छाँव तेरा,
झोंक दे तू खुद अब ,फिर घर तेरा ये गांव तेरा,।
फिर काम क्रोध लोभ से, न अधिक बन के चल तू,
पथिक है मुसाफिर पथिक बन के चल तू।।।

PATHIK HAI MUSAAFIR

pathik hai musaaphir , to pathik ban ke chal too,
dagar ko nidar kar na vyatith ban ke chal too.
le hausale ko hausale se , na atith ban ke chal too,
pathik hai musaaphir , to pathik ban ke chal too..
hai sar tera, hai paanv tera, ye dhoop bhee ye chhaanv tera,
jhonk de too khud ab ,phir ghar tera ye gaanv tera,.
phir kaam krodh lobh se, na adhik ban ke chal too,
pathik hai musaaphir pathik ban ke chal too…

BEST POEM
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अच्छे से रिश्तों को यूं निभाओ तो सही

अच्छे से रिश्तों को यूं निभाओ तो सही ,
न होगा बैर किसी से जरा प्रेम का दीप जलाओ तो सही।
दिखेगे घर सब स्वर्ग से अपने ,
खुद को संस्कारो की माला पहनाओ तो सही।।
मिलेगी ज्ञान की बाते नित नई नई,
चलकर बुजुर्गो के पास जरा जाओ तो सही।
न दिखेगा एक भी वृद्धाश्रम इस जहाँ में अपने,
जरा माँ बाप को घर मे अपनाओ तो सही।।
चाहते है एक शिक्षित समाज हम अपना,
तो बच्चो को घर में पढ़ाओ तो सही।
चाहते है एक सुंदर पत्नी और माँ को घर में ,
तो जरा बेटियों को कोख में बचाओ तो सही।।
न लगेगी धूप कभी तन और मन को अपने,
जरा पेड़ो को धरा पर लगाओ तो सही।
बनेगे इस जहाँ में सब इंसान अपने,
बस अहंकार को मन से भगाओ तो सही।।
बस अच्छे रिश्तों को यूँ निभाओ तो सही।।

ACCHE SE RISHTON KO YUN NIBHAO TO SAHI

achchhe se rishton ko yoon nibhao to sahee ,
na hoga bair kisee se jara prem ka deep jalao to sahee.
dikhege ghar sab svarg se apane ,
khud ko sanskaaro kee maala pahanao to sahee..
milegee gyaan kee baate nit naee naee,
chalakar bujurgo ke paas jara jao to sahee.
na dikhega ek bhee vrddhaashram is jahaan mein apane,
jara maan baap ko ghar me apanao to sahee..
chaahate hai ek shikshit samaaj ham apana,
to bachcho ko ghar mein padhao to sahee.
chaahate hai ek sundar patnee aur maan ko ghar mein ,
to jara betiyon ko kokh mein bachao to sahee..
na lagegee dhoop kabhee tan aur man ko apane,
jara pedo ko dhara par lagao to sahee.
banege is jahaan mein sab insaan apane,
bas ahankaar ko man se bhagao to sahee..
bas achchhe rishton ko yoon nibhao to sahee..


बहका आशिक़

हर ख़ुशी और ग़म में आप हमें साथ पायेंगे,
क्या आप हमारे बिन कभी रह पायेगे।
यूँ तो किस्मत लिखी है ऊपरवाले ने सबकी अलग अलग ,
मगर हकीकत की किस्मत हम तेरे साथ लिख जायेगे।।
होंगे जब उदास किसी पल किसी रोज आप,
तो मुस्कान बनकर आपके लबो पर छा जायेगे,
जो रूठेंगे आह भरकर हमारी बातों से आप,
तो खूबसूरत से शायर बन आपको मना जायेगे।।
एक न एक दिन हर ख़ुशी होगी आपके पास ,
जब हम आप को ख़ुशनुमा से पल कह जायेगे,
बात होगी केवल दो शब्द कहने की आपसे,
और हम मदहोश हो पूरी गजल कह जायेगे।।।।

BAHAKA AASHIQ

har khushee aur gam mein aap hamen saath paayenge,
kya aap hamaare bin kabhee rah paayege.
yoon to kismat likhee hai ooparavaale ne sabakee alag alag ,
magar hakeekat kee kismat ham tere saath likh jaayege..
honge jab udaas kisee pal kisee roj aap,
to muskaan banakar aapake labo par chha jaayege,
jo roothenge aah bharakar hamaaree baaton se aap,
to khoobasoorat se shaayar ban aapako mana jaayege..
ek na ek din har khushee hogee aapake paas ,
jab ham aap ko khushanuma se pal kah jaayege,
baat hogee keval do shabd kahane kee aapase,
aur ham madahosh ho pooree gajal kah jaayege….

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तू अपनी जिंदगी को मस्त कर

खुद की बन राह तू, खुद को ही प्रशस्त कर,
पानी है जो मंजिले तो , मुश्किलों को ध्वस्त कर,
हो सवेराएक नया तेरी जिन्दगी की राह में,
जो दे सके न रोशनी उस सूर्य को तू अस्त कर…
खुद की बन राह तू , खुद को ही प्रशस्त कर…

है वीर तू धीर तू, पर कर्मो के अधीन तू,
बन समुंदर तू धैर्य का, अकर्मो को पस्त कर !
खुद की बन राह तू, खुद को ही प्रशस्त कर…
तू अपनी जिन्दगी को मस्त कर, तू अपनी जिन्दगी को मस्त कर..

TU APNE ZINDAGI KO MAST KR

khud kee ban raah too , khud ko hee prashast kar,
paanee hai jo manjile to, mushkilon ko dhvast kar.
ho savera ek naya teree jindagee kee raah mein,
jo de sake na roshanee us soory ko too ast kar..
khud kee ban raah too , khud ko hee prashast kar..

hai veer too hai dheer too , par karmo ke adheen too.
ban samundar too dhairy ka ,akarmo ko past kar.
khud kee ban raah too, khud ko hee prashast kar..
too apanee jindagee ko mast kar, too apanee jindagee ko mast kar..

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BEST HINDI POEMS COLLECTION 2020

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कही मैं गुलजार तो नहीं

तुझे मैं बड़ा अच्छा लगने लगा हूँ,
सच बताओ कही मैं तेरा प्यार तो नही हूँ?
चाहूँ की इश्क़ तू मुझे भी हो जाये,
कही मैं नशे में खुमार तो नही हूँ।
ऐ इश्क़ क्यों वक्त बेवक़्त बन रही है
ग़ज़ल और शायरियां तुझ पर,
जरा ध्यान से देख मुझे,
कही मैं गुलजार तो नही हूँ।

KAHIN MEIN GULZAAR TO NAHI

tujhe main bada achchha lagane laga hoon,
sach batao kahee main tera pyaar to nahee hoon?
chaahoon kee ishq too mujhe bhee ho jaaye,
kahee main nashe mein khumaar to nahee hoon.
ai ishq kyon vakt bevaqt ban rahee hai
gazal aur shaayariyaan tujh par,
jara dhyaan se dekh mujhe,
kahee main gulajaar to nahee hoon.

Hindi Poem
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 ये मामा का रिश्ता भी बड़ा खाश होता है।

मैन बहुत सी कविताओ को रुख दिया,
मगर मामा शब्द में बड़ा ही मिठास होता है।
छू लेता है वो बहुत से रिश्तों को एक साथ,
क्योकि उसमे माँ रूपी दो शब्दों का वास होता है।
होती है लड़ाईया बहुत फिर भी झुक जाता है वो,
क्योंकि खुद से ज्यादा उसे अपनो पे विश्वास होता है।
देखा नही था मैंने अपने को ,मगर कमी किसी बात की भी न आई थी।
शायद मुझ पर मेरी माँ के बाद उसके ममता की ही परछाई थी।।
होती है ज्यो तकलीफ तो न जाने कैसे वो पास होता है,
सच मानो ये मामा का रिश्ता भी बड़ा खाश होता है।।।

YE MAMA KA RISHTA BHI BADA KHAAS HOTA HAI

main bahut see kavitao ko rukh diya,
magar maama shabd mein bada hee mithaas hota hai.
chhoo leta hai vo bahut se rishton ko ek saath,
kyoki usame maan roopee do shabdon ka vaas hota hai.
hotee hai ladaeeya bahut phir bhee jhuk jaata hai vo,
kyonki khud se jyaada use apano pe vishvaas hota hai.
dekha nahee tha mainne apane ko ,magar kamee kisee baat kee bhee na aaee thee.
shaayad mujh par meree maan ke baad usake mamata kee hee parachhaee thee..
hotee hai jyo takaleeph to na jaane kaise vo paas hota hai,
sach maano ye maama ka rishta bhee bada khaash hota hai…

BEST HINDI POEMS
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 घर का उजाला

‘दे हर खुशी मुझे उसने बड़े नाजों से पाला है,
मेरे घर के साथ साथ वो मेरी

आँखों का भी उजाला है’।
‘मैं चाह कर भी न उतार पाऊंगा ऋण उसकी ममता का,
क्योकि मुझे इतना पता है की उसने ही मेरा पेट पाला है’।।

‘छोटा था और मोटा था ऐसा बचपन भी मेरा होता था,
पड़ती थी पिता से डाँट तो माँ से ही लिपट कर रोता था।
न मारती थी मुझको और कहती तू तो मेरा लाला है,
मुझे इतना पता है कि उसने ही मेरा पेट पाला है।।
अब हो गया हूँ बड़ा भी और अपने पैरों पर खड़ा भी,
मेरी इस अंधेरी दुनिया मे तेरी ममता का ही उजाला है,
क्योकि मुझे इतना पता है कि उसने ही मेरा पेट पाला है”।।

GHAR KA UJALLA

de har khushee mujhe usane bade naajon se paala hai,
mere ghar ke saath saath vo meree aankhon ka bhee ujaala hai.
main chaah kar bhee na utaar paoonga rn usakee mamata ka,
kyoki mujhe itana pata hai kee usane hee mera pet paala hai..

chhota tha aur mota tha aisa bachapan bhee mera hota tha,
padatee thee pita se daant to maan se hee lipat kar rota tha.
na maaratee thee mujhako aur kahatee too to mera laala hai,
mujhe itana pata hai ki usane hee mera pet paala hai..
ab ho gaya hoon bada bhee aur apane pairon par khada bhee,
meree is andheree duniya me teree mamata ka hee ujaala hai,
kyoki mujhe itana pata hai ki usane hee mera pet paala hai”..

HINDI POEMS
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लिखता रहता हूँ 

मैं तो तेरे इश्क़ की दुकान में ,अब बिकता सा रहता हूँ,
की कभी हसमुख तो कभी पागलपन अब दिखता सा रहता हूँ
हमे ये असर ही तो है तेरे पागल प्यार का ओ सनम,
तभी तो पता नही क्या सोचता और क्या लिखता से रहता हूँ।।।।

LIKHTA REHTA HOON

main to tere ishq kee dukaan mein ,ab bikata sa rahata hoon,
kee kabhee hasamukh to kabhee paagalapan ab dikhata sa rahata hoon
hame ye asar hee to hai tere paagal pyaar ka o sanam,
tabhee to pata nahee kya sochata aur kya likhata se rahata hoon….

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चांदनी रात

यूं देर सवेर…. तू मुझे प्यार न कर,
समझ लूंगा तुझे दिल से , तू एतबार न कर।
चाहत मेरी तुझे खुद मेरे पास बुला लेगी पागल
यूँ बैठ चांदनी रातो में, तू इंतजार न कर ।।।

CHAANDNI RAAT

yoon der saver…. too mujhe pyaar na kar,
samajh loonga tujhe dil se , too etabaar na kar.
chaahat meree tujhe khud mere paas bula legee paagal
yoon baith chaandanee raato mein, too intajaar na kar …

 

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मेरी यादों का भरोसा

हो जिसे दर्द प्यार खोने का जनाब, वो रातो को कहाँ सोता है।।
प्यार मुक्कमल ही हो हर किसी का, भाई ऐसा थोड़े ही होता है,।।
न जाने कब रुला दे आपको एक ग़ज़ल मेरी, तो सम्भाल के रहिये,
क्योंकि मेरी ग़ज़ल और यादों का, भरोसा थोड़े ही होता है।।।।

MERE YAADON KA BHAROSA

ho jise dard pyaar khone ka janaab, vo raato ko kahaan sota hai..
pyaar mukkamal hee ho har kisee ka, bhaee aisa thode hee hota hai,..
na jaane kab rula de aapako ek gazal meree, to sambhaal ke rahiye,
kyonki meree gazal aur yaadon ka, bharosa thode hee hota hai….

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 प्यार में वार

छोड़ दिया जिस शख्स को , उस बात का मलाल करोगे क्या??
क्या गलत था, क्या सही हुआ, इस बात का सवाल करोगे क्या?
फिर पता चलेगा कि सोची समझी चाल थी घर वालों की उसके,
क्या जता आशिक़ी फिर से, उसके घर बवाल करोगे क्या।।।।

PYAAR MEIN VAAR

chhod diya jis shakhs ko , us baat ka malaal karoge kya??
kya galat tha, kya sahee hua, is baat ka savaal karoge kya?
phir pata chalega ki sochee samajhee chaal thee ghar vaalon kee usake,
kya jata aashiqee phir se, usake ghar bavaal karoge kya….

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बीता हुआ कल

मेरे कल से मुझे पहचान मत, कुछ जिंदगी मेरी छूटी हुई है,
अब बदल चुका हूं जिसकी खातिर, वो ही मुझसे रूठी हुई है।।
देखे है बहुत उतार-चढ़ाव, इस छोटी उम्र के सफर में,
यहाँ रास्तों की मुसीबतो से मेरी साँसे टूटी हुई है।
अब बदल लिया है खुद को, कुछ कर गुजरने की आस में,
फिर हौसले और प्यार से मैंने खुशिया लूटी हुई है।।
अब बदल चुका हूं, जिसकी खातिर ,वो ही मुझसे रूठी हुई है।।।

BEETA HUWA KAL

mere kal se mujhe pahachaan mat, kuchh jindagee meree chhootee huee hai,
ab badal chuka hoon jisakee khaatir, vo hee mujhase roothee huee hai..
dekhe hai bahut utaar-chadhaav, is chhotee umr ke saphar mein,
yahaan raaston kee museebato se meree saanse tootee huee hai.
ab badal liya hai khud ko, kuchh kar gujarane kee aas mein,
phir hausale aur pyaar se mainne khushiya lootee huee hai..
ab badal chuka hoon, jisakee khaatir ,vo hee mujhase roothee huee hai…


नमक का शहर

गर फरेबों की लगी थी महफ़िल,
तो सच बोलने को किसने कहा था?
फिर लगी थी दिल पे जो बात,
उस बात को बोलने को किसने कहा था।।
ये तो झूठे, फरेबों,और मक्कारो का ही शहर था मुखबिर,
और जब नमक का ही था शहर
तो जख्म खोलने को किसने कहा था।।।

NAMAK KA SHEHAR

gar pharebon kee lagee thee mahafil,
to sach bolane ko kisane kaha tha?
phir lagee thee dil pe jo baat,
us baat ko bolane ko kisane kaha tha..
ye to jhoothe, pharebon,aur makkaaro ka hee shahar tha mukhabir,
aur jab namak ka hee tha shahar
to jakhm kholane ko kisane kaha tha…

HINDI POEMS
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 घर तेरा तो गांव है

सोना चाहूँ जो तेरे ख़्यालातों के संग, तो सोकर भी वो मुझे सोने नहीं देते है।
रोना चाहूँ जो तेरी याद लेकर , तो नैना मुझे रोकर भी रोने नहीं देते है।
बड़ी कश्मकश के साथ तेरे हवाले तो कर दिया है, ख़ुद को मैंने
मगर जाने क्या ख़्यालात है दिल में, जो मुझे तेरा होके भी तेरा होने नहीं देते है।।

ये बारिशो का मौसम है, कही धूप तो कही छाँव है।
तू चल जरूर रहा है, मगर वजह तेरे ही पाँव है।
यूँ जान की बाजी क्या लगाना,मिट्टी के पुतले के लिए,
जो देख रहा तू शहर को ,जबकि घर तेरा तो गाँव है।।।

चल कस्ती को तू पार कर, थोड़ा बीच फिर मझदार कर।
ले चल किनारे फिर, जब खुद की तेरी नांव है।
फिर देख रहा शहर को क्यो,जबकि घर तेरा तो गांव है।।।

GHAR TERA TOH GANV HAI

sona chaahoon jo tere khyaalaaton ke sang, to sokar bhee vo mujhe sone nahin dete hai.
rona chaahoon jo teree yaad lekar , to naina mujhe rokar bhee rone nahin dete hai.
badee kashmakash ke saath tere havaale to kar diya hai, khud ko mainne
magar jaane kya khyaalaat hai dil mein, jo mujhe tera hoke bhee tera hone nahin dete

hai..ye baarisho ka mausam hai, kahee dhoop to kahee chhaanv hai.
too chal jaroor raha hai, magar vajah tere hee paanv hai.
yoon jaan kee baajee kya lagaana,mittee ke putale ke lie,
jo dekh raha too shahar ko ,jabaki ghar tera to gaanv hai…

chal kastee ko too paar kar, thoda beech phir majhadaar kar.
le chal kinaare phir, jab khud kee teree naanv hai.
phir dekh raha shahar ko kyo,jabaki ghar tera to gaanv hai…


इश्क़ का व्यापार

महफ़िल है दिलजलों की , मैं भी बढ़ जाऊं क्या??
लगा के पर गमों के इन हवाओं में उड़ जाऊं क्या।
यूँ तो शौख हमे भी है गमे-इश्क़ को हल करना,
इशारा दो फिर, मैं चुनाव लड़ जाऊं क्या।।।

ISHQ KA VYAPAAR

mahafil hai dilajalon kee , main bhee badh jaoon kya??
laga ke par gamon ke in havaon mein ud jaoon kya.
yoon to shaukh hame bhee hai game-ishq ko hal karana,
ishaara do phir, main chunaav lad jaoon kya…

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मैं शायर बदनाम हूं : 

वो अविभक्त चंचल मन सा, मैं एक उलझा सा काम हूं।
इत्र सुबह की किरणों सा, मैं ढलता हुआ एक शाम हूँ।।
वो ख़ुशी बांटती हलवाई, मैं ग़म का मारा जाम हूं।
”कविता” हुस्न कि रानी है, पर मैं “शायर” बदनाम हूं।।
वो रूप राज कि शहजादी, मैं बन कुमार सा श्याम हूं।

 शहरों का है नामकरण, मैं आवारा सा एक नाम हूं।
वो जीमेल सा डाकपत्र, मैं पक्षी का पैगाम हूं।
“कविता” हुस्न की रानी है, पर मैं “शायर” बदनाम हूं।।

वो इठलाती चंचल मन सी, मैं मंद मंद मुस्कान हूं।
बर्गर चाट बतासे सी, मैं बिन पैसे की दुकान हूं।
वो राजपत्र अधिकारी सी, मैं नौकर उनके समान हूँ।
“कविता” हुस्न की रानी है, पर “शायर” मैं बदनाम हूँ।!

MEIN SHAYAAR BADNAAM HUN | HINDI KAVITA

vo avibhakt chanchal man sa, main ek ulajha sa kaam hoon.
itr subah kee kiranon sa, main dhalata hua ek shaam hoon..
vo khushee baantatee halavaee, main gam ka maara jaam hoon.
kavita husn ki raanee hai, par main “shaayar” badanaam hoon..
vo roop raaj ki shahajaadee, main ban kumaar sa shyaam hoon.

shaharon ka hai naamakaran, main aavaara sa ek naam hoon.
vo jeemel sa daakapatr, main pakshee ka paigaam hoon.
“kavita” husn kee raanee hai, par main “shaayar” badanaam hoon..

vo ithalaatee chanchal man see, main mand mand muskaan hoon.
bargar chaat bataase see, main bin paise kee dukaan hoon.
vo raajapatr adhikaaree see, main naukar unake samaan hoon.
“kavita” husn kee raanee hai, par “shaayar” main badanaam hoon.!

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