Motivational Hindi Kavita and Gazal 2021-22


iss kavita me kavi batana chahta hai ki kabhi haaro mat ruko mat jhuko mat date raho nirantar prayas krte raho safalta aayegi jarur tumhare haatho me..


hindi kavita statusdairy

सवेरा :

नयन खोल देख की तिमिर ,

घनेरा था छट गया

सूर्य दीप्तिमान हो रहा,

तिमिर पीछे हट गया

तमस था सारा छट गया ,

भानु यह बतला रहा

साथ चलने को मनुज के ,

नव सबेरा ला रहा

 

जाग चल लड़ बड़ो आगे ,

स्वपन सब सच कर दिखा ।

हे मनुज संताप सारे ,

सतकर्म को कर मिटा।

वीरता की आयतें अब ,

तू नवेली गड़ जरा।

रास्ते मे रिपु के बन कर ,

सैल समान अड़ जरा।

 

अब काल के भी भाल पर ,

तिलक शोणित से लगा।

निज प्राण की बाती बना ,

रक्त से दीपक जला।

जमाने को भुलाकर के ,

आज रण में लड़ जरा।

मोह प्राणों का त्याग कर ,

आज रण में बढ़ जरा ।

 

जो ले सको प्राण रण में,

तुम दनुज के लीजिए।

कर्तव्यो की वेदी पर,

या निज प्राण दीजिए ।

सिर अपना महादेव की ,

माला बना दीजिए ।

रण की माँ रणचंडी का,

साज ख़ू से कीजिये ।

 

सत्कर्म निष्ठा से सदा ,

वीर खुद को तारते ।

धर्म शस्त्रों से ही सदा ,

शत्रू को संघारते ।

शीश वीर के रणभूमि में,

 

भले कटते रहे।

तन पर शीश नही तो क्या ,

कटे धड़ लड़ते रहे ।

 

देश के हित के लिए जो ,

कोई लड़ेगा यहाँ

वो मरकर भी नाम अमर ,

अपना करेगा यहाँ


statusdairy-images-hindi-gazal

इशक

✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻
याद तेरी मुझको हर पल ही सताती हैं
मैं भूल गया ख़ुद को मुझे याद दिलाती हैं

रो रोकर के सनम मेरे अब सूख गए आँसू
ये जाने वफ़ा मुझको तू कितना रूलाती हैं

मेरे साथ नही तो फिर तन्हा ही रहना था
साथ रहके रकीबो के मेरे दिल को जलाती हैं

प्यार से रख लेते तुम मुझको बटुए में
कागज का बदन मेरा क्यो आग लगाती हैं

बदनाम न हो जाये तेरे हुश्न का तबस्सुम ये
लाज का हैं ये पर्दा क्यो रुख से हटाती हैं

तेरे दिल मे गिले जो है कह दो न धरम से तुम
मेरे प्यार की औरों को क्यो बात बताती हैं

कवि – धरम सिंहः


Gazal ke madhyam se kavi ek aashik ka haal banya kar rahe jab uski premika use chor jaati hai aur kavi bata rahe hai kaise uske chorne ke baad bhi aashik ko iski chinta lagi rehti hai..


 for more kavita visit: https://statusdairy.com/poetry/

For interesting blogs: http://blog.graminbharti.org/

Aashique ka junun Hindi Shayari by Aman Jee

Love is eternal it is something is can’t be expressed in words it is the purest form of trust between two souls.

Aashik ki dubidha

Dillagi ka aalam kya bataye ham ,
tanhaiyo ke mausam me kise sataye ham ,
khuda jise mana hamne kambaqt is ishak me ,
wo hi jab hai rutha hamse to bataiye hame ,
kise jaa kar ab rijhaye ham  .

 

आशिक की दुविधा

दिल्लगी का आलम क्या बताये हम ,

तनहाइयो के मौसम में किसे सताए हम ,

खुदा जिसे माना हमने कम्बक्त इस इश्क़ में ,

वो ही जब है रूठा हमसे तो बताइये हमें ,

कीसे जा कर अब रिझाये हम ।

 

Ek premika aur ek premi 

kya kahu unki baat hi nirali hai ,
jahaa jaaye wo wahi hariyali hai ,
ham to kambaqt registaan se ho gaye ,
jahaa bhi gaye wahi bhul-bhulaiye me kho gaye .

 

एक प्रेमिका और एक प्रेमी

क्या कहु उनकी बात ही निराली है ,

जहा जाए वो वही हरियाली है ,

हम तो कम्बक्त रेगिस्तान से हो गए ,

जहा भी गए वही भूल-भुलैये में खो गए ।

 

Aashiki ka junun

Maanaa ki zid ab karta nahi ,
par ziddi wahi purana hu ,
haa tere piche jana chhor diya ,
par ab bhi tera deevana hu .

 

आशिकी का जुनून

माना की ज़िद अब करता नहीं ,

पर ज़िद्दी वही पुराण हु ,

हा तेरे पीछे जाना छोर दिया ,

पर अब भी तेरा दीवाना हु ।

 

saccha aashik

Ho agar manjur unhe ,
to saath chalenge umr bhar ,
aur gar jo hogi unki kaamna ,
to ham ban sakenge hamsafar .

 

सच्चा आशिक

हो अगर मंजूर उन्हें ,

तो साथ चलेंगे उम्र भर ,

ओर गर जो होगी उनकी कामना ,

तो हम बन सकेंगे हमसफ़र ।

 

haay ye julfen teri ,
lehrati ,balkhati ,itrati hai,
sama to kya shamme me bhi ,
raushni bikher den kyuki ,
piche inke nigahe jo teri sharmati hai .

 

हाय ये जुल्फें तेरी ,

लेहराती , बलखाती ,इतरती है,

समा तो क्या शम्मे में भी ,

रौशनी बिखेर दें क्युकी ,

पीचे इनके निगाहे जो तेरी शर्माती है ।

                            कवि – अमन जी

HOLI KA TYOHAAR (होली का त्योहार)


Hm sabo ke beech kaise aaya ye holi ka rangeen hasin tyohaar aisa tyohaar jisme dusmani dilo ki bhula kar gale sabhi lag jaate hai aur khusiya apaar manate hai. ye kawita ussi tyohaar ke bare me hai jo logon ko sath laata hai..

HOLI KA TYOHAAR

Devo par se dol raha tha viswash ,
hiranyakashyapu ka badh raha tha paap ,
putr tha narayan ka bhakt apaar ,
jhel gaya hari naam se wo har ek waar ,
tab holika ne dahan ka kiya prayas ,
odhi khud wardani chadar aur liya ,
godh me nanha bhaqt prahlad hari ki mahima ,
hui apaar chalne laga tab tez wayaar ,
chadar ur gayi tab tan se dhak liya jaa kar prahlad,
jali holika dhu-dhu kar kar lapte uth rahe akaash,
hash raha tha agyani aham se khud ko samajhta tha bidwaan ,
aur bujhi jab agni chita ki tab paya usme bhaqt mhaan,
aur mani tab khusiya jag me jali holika utha ulaash ,
harshit tha man tab sabka sabne tab manai khusi apaar ,
aur man raha hai tab hi se holika dahan ke baad holi ka tyohaar।।।

होली का त्योहार

देवो पर से डोल रहा था विश्वाश ,
हिरण्यकश्यपु का बढ रहा था पाप ,
पुत्र था नारायण का भक्त अपार ,
झेल गया हरी नाम से वो हर एक वार ,
तब होलिका ने दहन का किया प्रयास ,
ओढ़ि खुद वरदानी चादर और लिया ,
गोद में नन्हा भक्त प्रह्लाद हरी की महिमा ,
हुई अपार चलने लगा तब तेज़ वयार ,
चादर उर गयी तब तन से धक् लिया जा कर प्रह्लाद,
जली होलिका धु-धु कर-कर लपटे उठ रहे आकाश,
हस रहा था अज्ञानी अहम् से खुद को समझता था विद्वान ,
और बुझि जब अग्नि चिता की तब पाया उसमे भक्त महान,
और मणि तब खुसिया जग में जाली होलिका उठा ऊल्लाश ,
हर्षित था मन तब सबका सबने तब मनाई खुसी अपार ,
और मन रहा है तब ही से होलिका दहन के बाद होली का त्योहार।।।
: AMAN JEE


होली की मुबारकबाद ।
——————————-

विष्णु की भक्ति में
रमने लगे प्रहलाद
तब हिरण्यकश्यप को
होने लगा अवसाद
क्रोधित हिरण्यकश्यप की
होलिका ने सुनी फरियाद
धू,धू होलिका जली
कथा है सबको याद
इस पावन पर्व पर
होली की मुबारकबाद
घर-घर जाकर
पकवान खाकर
गले लगाओ
दिल को दिल से मिलाओ
रंग, अबीर गुलाल लगाकर
नफरतों जड़ से मिटाकर
दूर करो,सारे विवाद
कवियों की है ,यह फ़रियाद
इस पावन पर्व पर
होली की मुबारकबाद
साहित्य की होली,
संगीत की होली
ब्रज की होली से
उल्लसित हुआ जहान
विद्यापति, घनानंद, चर्चित हुए थे साहित्य में रसखान ।
मन का मृदंग बाज रहा है
दिल में हुआ है नाद
इस पावन पर्व पर
होली की मुबारकबाद ।

नेतलाल प्रसाद यादव ।।


for more interesting poem: https://statusdairy.com/poetry/hindi-poem/
for our blog visit: https://blog.graminbharti.org/