रक्षा पर्व

बहन का फर्ज निभाया तुमने मैं भाई का फर्ज निभाऊँगा

जहाँ पसीना बहे बहन का बहा पर रक्त बहाऊंगा

ले कसम उठाता हूँ मैं बहना सम्मान तुझे दिलाऊँगा

तेरे जीवन का रक्षा प्रण लेकर मैं रक्षा पर्व मनाऊँगा

देश हित काज कर मैं, देश की ख़ातिर मुरुगा

हैं प्रण ये मेरा मुझे ,मैं सांस अंतिम तक लड़ूंगा

राह में हो सघन अंधेरे ,पर बहन डरना नही

राह में तेरी सदा मैं ,दीप बनकर ही जलूगा

 

कसम मुझे हैं महादेव की मैं भाई का फर्ज निभाऊँगा

तेरी राहो के कांटे चुन चुन राखी का कर्ज चुकाऊंगा

गोद मुझे स्नेह की देकर बहना धर्म निभाया तुमने

तप्ति राह में तरु घना बन ,मैं भाई का धर्म निभाऊँगा

 

Raksha Sutra Raksha Bandahan Special Kavita 2021-22 StatusDairy

पड़े जरूरत जब भाई की,तुम आबाज लगा देना

भाई हैं जिन्दा तेरा तुम हालातों को ये बात बता देना

रहेगी जान जिश्म में जब तक तुझपर संकट न आएगा

जिस दिन मरे ये भाई तेरा तुम जलता दीप बुझा देना


 

कविता -मौन

 


जो मौन रहकर ही ,अत्यचार को सहता जाता है

इतिहास की परिपाटी पर, वो कायर कहलाता हैं

जिसने अपमान क्रूरता ,औऱ छल को नमन किया

उसने तो खुद ही गुलाम, अपना सुंदर वतन किया

 

मोन रहे अत्याचार सहा, गिराया मान जवानी का

सब जानकर चुप्पी साधी ,कारण बना गुलामी का

यदी मोन पड़े रहते वो भी ,तो स्वतंत्रता कैसे पाते

जो विरोध न करते गद्दारों ,तो परतन्त्र ही रह जाते

 

आओ हम आबाज़ उठाये ,आदर्शों का मान रहें

अधिकार रहे हर गरीब का , बुजुर्ग का सम्मान रहें

न कुरूरता न छल हो, और हर तबके की शान रहे

जैसे सागर जल बहता हैं, ऐसे अपना हिदुस्तान रहे

 

जो हक़ मारते गरीब का, हनन करते अधिकारों का

एक दिन पतन सुनिश्चिंत होगा, ही ऐसी सरकारों का

अत्याचारों को चुप सह जाएं ,हम इतने मजबूर नही

उनको भी तुम बतला देना, के हमसे दिल्ली दूर नहीं

 

विरोध नही करते जो भी अंधियारे का

वो मुह कैसे देखे पाएंगे उजियारे का

 

क्यो हाथ नही उठते तेरी सम्मान का दीया जलाने को

क्यो मजबूर हुआ हैं जुगनू रस्ता तुम्हे दिखाने को

 

छल कपट कुरूरता पर जब जब चुप्पी साधी है

तब तब ही मानव सम्मान की समझो बनी समाधि हैं

आओ मिलकर आबाज़ उठाये मान रहे अधिकारों का

ताज गिरा देंगे हम धर्मा अब ऐसी सरकारों का


स्वरचित
कवि धरम सिंह
ग्राम सोंठीया गंजबासौदा विदिशा मप्र

 


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