VOICE OF UNBORN CHILD | HINDI POEM

A Hindi Poem on “Voice of Unborn Child” 

Here, voice of unborn child describe by poet through a Hindi Poem. Poet try to express feelings and pain of an unborn child to her mother. Read it and enjoy the words.


VOICE OF UNBORN CHILD | HINDI POEM | STATUS DAIRY

ओ माँ मुझे इस दुनिया में आने तो देती..!

फलक तक पंख फैलाने तो देती,
तेरी आँचल में सर छुपाने तो देती,
क्यों मारा इतनी बेहरहमी से तुमने ?
ओ माँ मुझे इस दुनिया में आने तो देती..!

बोझ नहीं बनती तेरे गठरियों का,
तेरे आँचल का कर्ज चुकाने तो देती,
कतरा कतरा अलग कर देती,
उन जालिमो का रक्त बहाने तो देती,
ओ माँ मुझे इस दुनिया में आने तो देती..!

बेजुबाँ ही मार डाला तुमने,
थोडा चीखने चिल्लाने तो देती,
औकात कहाँ इन आँधियों में बुझाने की,
मुझे लौ जलाने तो देती,
ओ माँ मुझे इस दुनिया में आने तो देती..!

आज भी तुझे एक बेटा चाहिए,
बेटियों का शान दिखने तो देती,
आज रावण को मैं जलाती,
इन लडको को चूड़ियाँ पहनाने तो देती,
ओ माँ मुझे इस दुनिया में आने तो देती..!

तेरा वजूद भी एक औरत है,
इन जिन्दा लाशो को ये जताने तो देती,
मदर टेरेसा, कल्पना चावला, रानी लक्ष्मी बाई,
इनकी कहानी इन्हें बतलाने तो देती,
क्यों मारा इतनी बेहरहमी से तुमने,
ओ माँ मुझे इस दुनिया में आने तो देती..!

सुना है खुशियाँ पकती हैं तेरे हाथों में,
तेरे हाथों से एक निवाला खाने तो देती,
नहीं मांगती तुझे अमृत का प्याला,
बस दो बूँद दूध का प्यास बुझाने तो देती,
ओ माँ मुझे इस दुनिया में आने तो देती..!

क्या बिगाड़ा था लड़की होना मेरा,
पारस पैरों तले पिघलने तो देती,
नहीं चाहिए मुझको राजमहल या शीशमहल,
एक छोटी सी कुटिया बसाने तो देती,
ओ माँ मुझे इस दुनिया में आने तो देती..!

चढ़ा दो शूली पर उन दहेज़ के ठेकेदारों को,
कटी पतंग फिरसे उड़ने तो देती,
गर्व होता तुझे मेरा बेटी होना,
तुझे माँ कहूँ इतनी सी हिम्मत जुटाने तो देती,
ओ माँ मुझे इस दुनिया में आने तो देती..!

: आशीष कुमार शाव 


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